श्रम विभाजन और जाति प्रथा Class 10 Notes | Godhuli Bhag 2 Chapter 1
Bihar Board Class 10 Hindi Chapter 1 Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Notes is written by Dr. Bhimrao Ambedkar. In this post you will get Jeevan Parichay, Saransh, Book Question Answer, Important Question Answer, 20+ Objective MCQ and Previous Year Questions from 2011 to 2026. This notes is important for Bihar Board Exam 2026.
बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी अध्याय 1 श्रम विभाजन और जाति प्रथा नोट्स डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखा गया है। इस पोस्ट में आपको जीवन परिचय, सारांश, किताब के प्रश्न-उत्तर, महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर, 20+ ऑब्जेक्टिव प्रश्न और 2011 से 2026 तक के पिछले वर्षों के प्रश्न मिलेंगे। यह नोट्स बिहार बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए महत्वपूर्ण है।

Table of Contents
- श्रम विभाजन और जाति प्रथा के लेखक – डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय
- श्रम विभाजन और जाति प्रथा पाठ का सारांश
- श्रम विभाजन और जाति प्रथा शब्दार्थ
- गोधूलि भाग 2 Chapter 1 के प्रश्न-उत्तर
- महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
- 20+ ऑब्जेक्टिव प्रश्न (MCQ)
- पिछले वर्षों के पूछे गए प्रश्न (2011-2026)
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथा के लेखक – डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। इनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। इन्हें भारतीय संविधान का निर्माता कहा जाता है। इन्हें बाबा साहब के नाम से भी जाना जाता है। इनका देहांत 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हुआ था।
3. श्रम विभाजन और जाति प्रथा पाठ का सारांश
इस निबंध में डॉ. अंबेडकर कहते हैं कि जाति प्रथा श्रम विभाजन का ही एक रूप नहीं, बल्कि श्रमिकों का विभाजन है। जाति प्रथा के कारण व्यक्ति को अपना पेशा अपनी रुचि से चुनने की स्वतंत्रता नहीं मिलती, उसे जबरदस्ती अपने जातिगत पेशे को ही करना पड़ता है। यह प्रथा बेरोजगारी को जन्म देती है और समाज की आर्थिक उन्नति में बाधक है।
विस्तृत सारांश –
लेखक का मानना है कि एक आदर्श समाज में श्रम का विभाजन आवश्यक है, लेकिन भारत में जाति प्रथा के कारण यह विभाजन स्वाभाविक नहीं रहा। यहाँ पेशे का चुनाव व्यक्ति की क्षमता और रुचि के आधार पर नहीं, बल्कि जन्म के आधार पर होता है। इस कारण कई लोग ऐसे काम करने को मजबूर होते हैं जिनमें उनकी रुचि नहीं होती। इससे न तो कार्यकुशलता बढ़ती है और न ही समाज का विकास होता है। इसलिए अंबेडकर जी जाति प्रथा को समाज के लिए हानिकारक मानते हैं।
3. श्रम विभाजन और जाति प्रथा – शब्दार्थ
श्रम विभाजन – काम का बँटवारा
श्रमिक – काम करने वाला मजदूर
रुचि – पसंद / इच्छा
पेशा – रोजगार, काम-धंधा
बाधक – रुकावट पैदा करने वाला
स्वाभाविक – प्राकृतिक रूप से
कार्यकुशलता – काम करने की क्षमता
आदर्श – सबसे अच्छा नमूना
व्यवसाय – धंधा, रोजगार
हानिकारक – नुकसान पहुँचाने वाला
4. गोधूलि भाग 2 Chapter 1 के प्रश्न-उत्तर
बोध और अभ्यास
पाठ के साथ
प्रश्न 1. लेखक किस विडंबना की बात करते हैं? विडंबना का स्वरूप क्या है?
उत्तर: लेखक जाति प्रथा पर आधारित श्रम विभाजन की विडंबना की बात करते हैं। इस विडंबना का स्वरूप यह है कि जाति प्रथा में श्रम का विभाजन मनुष्य की रुचि और क्षमता पर नहीं बल्कि जन्म पर आधारित होता है। इसमें मनुष्य को अपना पेशा चुनने की स्वतंत्रता नहीं होती।
